5 Easy Facts About Grah pooja Tantra kriya Described

मार्कशीट्स बैकडेट में बीपीएड में दाखिला दिखाकर तैयार की गई थीं.

सामग्री तैयार करें: मिट्टी का पात्र (जिसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी भरी हो)

* ऐसी बीमारियां जिनका इलाज संभव नहीं है, वह भी काली की पूजा से समाप्त हो जाती हैं।

जीवन में आने वाले संकट और बाधाएं दूर होती हैं।

अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।

इस दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं पूजा विधि क्या है, जानते हैं सब डिटेल में.

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Gupt Navratri is particularly critical for many who are deeply involved with the sphere of tantra, yoga, mantra, and sadhana. This is the greatest time to obtain achievements in Unique sadhana also to receive blessings within the Guru.

अखंड दीपक जलाएं और नौ दिनों तक जलने दें।

कलश स्थापना कब होगी, भगवती की विदाई किस दिन है? जानते हैं एक्सपर्ट से.

चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई,

कलश के ऊपर नारियल रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर कलावा से बांधें।

मां की आरती गाएं, उन्हें फूल, अक्षत चढ़ाएं और बेदी से कलश को website उठाएं।

कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं।

फिर कलश को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा के माध्यम से उसे बांधें। 

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